सिन्धु घाटी सभ्यता
1920 के दशक में भारत के पुरातत्व विभाग द्वारा सिन्धु घाटी में खुदाई की गई थी, जिसमे खंडहरों का पता लगाया गया था। और इसमें दो शहर ( हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के अवशेष निकल कर आए।
दुनिया में सबसे प्रारंभिक तीन सभ्यताएं थी, जिसमे सिन्धु घाटी सभ्यता सबसे व्यापक है , जिसे हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है ।
भारत का इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता के साथ आरंभ हुआ, यह दक्षिण एशिया के पश्चिमी हिस्से में लगभग 2500 B.C. में फली फूली ।
सिन्धु घाटी सभ्यता की बुनियादी विशेषताएं –
- सिन्धु घाटी सभ्यता चार प्राचीन शहरी सभ्यताओं में सबसे बड़ी है, इसे हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है।
- जॉन मार्सल पहले विद्वान थे जिन्होंने 1924 में दुनिया के सामने सिंधु घाटी में एक नई सभ्यता की खोज की घोषणा की थी।
- इन शहरों में अच्छी तरह से प्रबंधित जल निकासी प्रणाली, गड़वाले किले थे ।
- इस सभ्यता के मुख्य केंद्र पाकिस्तान में है। इस सभ्यता के प्रसिद्ध स्थल मोहनजोदड़ो और चन्हुदडॉ है।
- महान स्नानागार का उपयोग धार्मिक स्नान के लिए किया जाता था । इसे ईंटो से ढका जाता था, जिस पर प्लास्टर लगाया जाता था।
- उनके चार दिवारी वाले शहरों में महत्वपूर्ण इमारत थी – महान स्नानागार, अन्न भंडार और सभाभवन ।
- हड़प्पा वासी पौधो, जानवरों, पक्षियों और प्रकृति की शक्तियों की पूजा करते थे ।
- हड़प्पा सभ्यता के लोग सबसे पहले कपास का उत्पादन करते थे ।
- कई लोग पेड़ पौधों , जानवर, पक्षियों और पत्थरों की भी पूजा करते है, हालांकि मंदिरों का कोई सबूत नहीं मिला है ।
- सिन्धु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल मोहनजोदड़ो है।
- भारत में सिंधु सभ्यता का बड़ा स्थल राखीगढ़ी है।
- मुख्य फसल – गेहूं, जौ, राई, चावल, सरसो और मटर ।
हड़प्पा सभ्यता की भौगोलिक सीमा :
- पूर्व – आलमगीरपुर (u.p)
- पश्चिम – सुतकंगेडोर
- उत्तर – मांडू (जम्मू कश्मीर)
- दक्षिण – दायमाबाद (महाराष्ट्र)
हड़प्पा सभ्यता के मुख्य स्थल :
1. हड़प्पा : (1921)
- स्थान: पंजाब (पाकिस्तान)
- नदी: रावी
- खोजकर्ता: दयाराम साहनी
- प्राप्त अवशेष: स्टोन डांसिंग नटराज, देवी मां की मूर्ति, छः अन्न भंडार की दो पंक्तियां आदि ।
2. मोहनजोदड़ो : (1922)
- स्थान : लरकाना (पाकिस्तान)
- नदी : सिंधु
- खोजकर्ता : R.D. बनर्जी
- प्राप्त अवशेष : महान स्नानागार, महान अन्न भंडार, कांसे की बनी नाचती हुई लड़की की प्रतिमा, पशुपति महादेव आदि
3. चन्हुदाडो : (1931)
- स्थान : सिंध (पाकिस्तान)
- नदी : सिंधु
- खोजकर्ता : N.G. मजूमदार
- प्राप्त अवशेष ; स्याहिदानी, काजल और लिपस्टिक, बैलगाड़ी की कांस्य मूर्तियां ।
4. लोथल : (1954)
- स्थान : गुजरात
- नदी : भोगव
- खोजकर्ता : S.R. राव
- प्राप्त अवशेष : चावल के साक्ष्य, बंदरगाह और गोदी, एकल गढ़, शतरंज का खेल ।
5. कालीबंगन : (1961)
- स्थान : राजस्थान
- नदी : घग्गर
- खोजकर्ता : B.B. लाल
- प्राप्त अवशेष: सात अग्निवेदी, ऊंट की हड्डियां, दोहरा गढ़, लकड़ी का हल, खेत जोत, आयताकार कब्र एवं गोलाकार कब्र, कर्मकांड आदि ।
6. राखीगढ़ी : (1963)
- स्थान : हरियाणा
- नदी : घग्गर
- खोजकर्ता : सूरजभान
- प्राप्त अवशेष: कांस्य खिलौने, टेराकोटा के पहिए, चांदी पर सूती कपड़े के निसान ।
7. धोलावीरा : (1967–68)
- स्थान : गुजरात
- नदी : लूनी
- खोजकर्ता : J.P. जोशी
- प्राप्त अवशेष: अद्वितीय जल प्रबन्धन प्रणाली, रॉक कट वास्तुकला, बांध ।
8. सुरकोटडा : (1972)
- स्थान : गुजरात
- नदी : दश्त
- खोजकर्ता : P. जोशी
- प्राप्त अवशेष: घोड़े के साक्ष्य, अंडाकार कब्र ।
9. बनवाली : (1973)
- स्थान : हरियाणा
- नदी : सरस्वती
- खोजकर्ता : R.S बिष्ट
- प्राप्त अवशेष : हल की आकृति, अच्छी गुणवत्ता वाले जौ के साक्ष्य ।
हड़प्पा सभ्यता का अंत :
लगभग 1200 ईसा पूर्व यह सभ्यता पूरी तरह से समाप्त हो गई।
सभ्यता के अंत के कारण – जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक बाढ़, नदियों के सूखने और स्थानांतरण ने सभ्यता को कमजोर कर दिया था , लेकिन इसके अंतिम विलुप्त होने की संभावना बड़े पैमाने पर विनाश या आक्रमण द्वारा संभावित घटनाए हैं ।
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