भू –आकृति विज्ञान (Geomorphology)


भू–आकृति विज्ञान भूगोल का वह भाग है, जिसमे विभिन्न कारकों द्वारा उत्पन्न हलचलों के कारण भौगोलिक आक्रतियो का निर्माण होता है। 

   भू–आकृति विज्ञान की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के Geomorphology से हुई है, जिसका शाब्दिक अर्थ स्थलरूपों का अध्ययन है ।

भू–आकृति विज्ञान का वर्तमान स्वरूप विगत शताब्दियों में हुए क्रमिक विकासो के फलस्वरूप संभव हुआ है । स्थलस्वरूपों का प्रारंभिक अध्ययन ग्रीस, यूनान तथा अरब में 500 ईस्वी पूर्व से प्रारंभ हुआ है।

इस क्षेत्र में हेरोडोट्स, अरस्तू, एवं स्त्रेवो का महत्वपूर्ण योगदान था ।

भू–आकृति विज्ञान मुख्य रूप से स्थलरुपों का अध्ययन है,  जिसके अंतर्गत भू –पटल एवं सागर नितल के विभिन्न रूपों का अध्ययन किया जाता है ।

भू–आकृति विज्ञान के अंतर्गत अध्ययन किए जाने वाले स्थल रूपों को निम्नलिखित 3 प्रकार के उच्चावचों को विभाजित किया जाता है –


भू–आकृतियों का विभाजन


1.प्रथम श्रेणी की भू–आकृतियां – इन भू–अक्रतियो का निर्माण सबसे पहले हुआ है, ये भू–तल सबसे बड़ी भू–आकृतियां है, 

2.द्वितीय श्रेणी की अक्रतिया– 

3.तृतीय श्रेणी की अक्रतिया–